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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 4 • Mantra 38

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 4 • मन्त्र 38

12.4.38

Mantra ID: 12.4.38

यो वे॒हतं॒ मन्य॑मानो॒ऽमा च॒ पच॑ते व॒शाम् । अप्य॑स्य पु॒त्रान्पौत्रां॑श्च या॒चय॑ते॒ बृह॒स्पतिः॑ ॥ (३८)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.4.38 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह वशा अन्य गायों में ताप बढ़ाती हुई घूमती है. यदि इस का स्वामी इसे दान नहीं करता तो वह उस के लिए विष का दोहन करती है. (३८)

EN English Translation

This vasa roams around increasing the temperature in other cows. If its owner does not donate it, she exploits the poison for it. (38)

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