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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 4 • Mantra 40

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 4 • मन्त्र 40

12.4.40

Mantra ID: 12.4.40

प्रि॒यं प॑शू॒नां भ॑वति॒ यद्ब्र॒ह्मभ्यः॑ प्रदी॒यते॑ । अथो॑ व॒शाया॒स्तत्प्रि॒यं यद्दे॑व॒त्रा ह॒विः स्यात् ॥ (४०)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.4.40 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ब्राह्मणों को वशा का दान कर देने पर वशा का स्वामी पशुओं का प्रिय होता है. वशा देवताओं को हवि के रूप में प्रदान की जाती है. (४०)

EN English Translation

When the swami of the vasha is dear to the animals when the brahmins donate the vasha. Vasha is provided to the gods in the form of Havi. (40)

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