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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 4 • Mantra 43

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 4 • मन्त्र 43

12.4.43

Mantra ID: 12.4.43

कति॒ नु व॒शा ना॑रद॒ यास्त्वं वे॑त्थ मनुष्य॒जाः । तास्त्वा॑ पृच्छामि वि॒द्वांसं॒ कस्या॒ नाश्नी॑या॒दब्रा॑ह्मणः ॥ (४३)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.4.43 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे नारद! तुम ऐसी कितनी गायों को जानने वाले हो जो मनुष्यों में प्रकट होती हैं. तुम विद्वान्‌ हो, इसी कारण मैं तुम से पूछता हूं. अब्राह्मण वशा के प्राशन अर्थात्‌ खाने से बचे. (४३)

EN English Translation

O Narada! You know so many cows that appear in humans? You are a scholar, that's why I ask you. Avoid eating the pran of Abrahman Vasha. (43)

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