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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 4 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 4 • मन्त्र 9

12.4.9

Mantra ID: 12.4.9

यद॑स्याः॒ पल्पू॑लनं॒ शकृ॑द्दा॒सी स॒मस्य॑ति । ततोऽप॑रूपं जायते॒ तस्मा॒दव्ये॑ष्य॒देन॑सः ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.4.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यदि गाय के गोबर आदि को दासी फेंकती है तो गाय का स्वामी उस पाप से नहीं छूट पाता तथा कुरूप हो जाता है. (९)

EN English Translation

If the maid throws cow dung etc. then the owner of the cow is not able to get rid of that sin and becomes ugly. (9)

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