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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 7 • Mantra 11

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 7 • मन्त्र 11

12.7.11

Mantra ID: 12.7.11

स॑र्वज्या॒निः कर्णौ॑ वरीव॒र्जय॑न्ती राजय॒क्ष्मो मेह॑न्ती ॥ (११)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.7.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सभी प्रकार से आयु को क्षीण करने वाली यह गौ कानों को हिलाती है. यह गौ अपने मूत्र को त्यागती हुई क्षय अर्थात्‌ विनाश को उत्पन्न करने वाली हो जाती है. (११)

EN English Translation

This cow, which weakens age in all ways, moves the ears. This cow discards its urine and becomes the cause of decay i.e. destruction. (11)

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