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अथर्ववेद

Kanda 12 • Sukta 8 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 12 • सूक्त 8 • मन्त्र 5

12.8.5

Mantra ID: 12.8.5

अ॒घं प॒च्यमा॑ना दुः॒ष्वप्न्यं॑ प॒क्वा ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 12.8.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ब्राह्मण की यह गाय पकाते समय व्यसनों अर्थात्‌ बुरी लतों को बढ़ाने वाली है तथा पक जाने पर बुरे स्वप्नों का कारण बनती है. (५)

EN English Translation

This cow of Brahmin is going to increase addictions i.e. bad addictions while cooking and causes bad dreams when cooked. (5)

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