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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 1 • Mantra 19

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 1 • मन्त्र 19

13.1.19

Mantra ID: 13.1.19

वाच॑स्पते सौमन॒सं मन॑श्च गो॒ष्ठे नो॒ गा ज॒नय॒ योनि॑षु प्र॒जाः । इ॒हैव प्रा॒णः स॒ख्ये नो॑ अस्तु॒ तं त्वा॑ परमेष्ठि॒न्पर्य॒हमायु॑षा॒ वर्च॑सा दधामि ॥ (१९)

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अथर्ववेद मन्त्र 13.1.19 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वाचस्पति! हमारा मन प्रसन्न रहे. तुम हमारे गोष्ठ में गायों को प्रकट करो तथा हमारी पत्नियों में संतान को उत्पन्न करो. प्राण हमारे साथ मित्र भाव से रहे. मैं आयु और तेज से तुम्हें धारण करता हूं. (१९)

EN English Translation

O Vachaspati! May our mind be happy. You reveal cows in our seminar and produce children in our wives. Pran stayed with us in a friendly manner. I hold you by age and fast. (19)

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