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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 1 • Mantra 23

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 1 • मन्त्र 23

13.1.23

Mantra ID: 13.1.23

इ॒दं सदो॒ रोहि॑णी॒ रोहि॑तस्या॒सौ पन्थाः॒ पृष॑ती॒ येन॒ याति॑ । तां ग॑न्ध॒र्वाः क॒श्यपा॒ उन्न॑यन्ति॒ तां र॑क्षन्ति क॒वयोऽप्र॑मादम् ॥ (२३)

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अथर्ववेद मन्त्र 13.1.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह रोहिणी और रोहित का धाम है, पृषती इसी मार्ग से गमन करती है. उसे गंधर्व ऊपर ले जाते हैं. चतुर व्यक्ति सावधानी से इस की रक्षा करते हैं. (२३)

EN English Translation

This is the abode of Rohini and Rohit, Prishati travels through this route. Gandharva takes him upstairs. Clever people carefully protect it. (23)

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