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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 1 • Mantra 28

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 1 • मन्त्र 28

13.1.28

Mantra ID: 13.1.28

समि॑द्धो अ॒ग्निः स॑मिधा॒नो घृ॒तवृ॑द्धो घृ॒ताहु॑तः । अ॑भी॒षाड् वि॑श्वा॒षाड॒ग्निः स॒पत्ना॑न्हन्तु॒ ये मम॑ ॥ (२८)

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अथर्ववेद मन्त्र 13.1.28 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये अग्ने प्रदीप्त हो कर घृत से प्रबुद्ध हुए हैं. इस में घृत की आहुति दी गई है. अग्नि देव शन्रुओं को पराजित करने वाले हैं. अतः वे मेरे शत्रुओं का संहार करें. (२८)

EN English Translation

These people have become illuminated and enlightened with ghee. In this, ghrit has been sacrificed. Agni Dev is going to defeat the shanrus. So let them kill my enemies. (28)

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