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13.1.36
उत्त्वा॑ य॒ज्ञा ब्रह्म॑पूता वहन्त्यध्व॒गतो॒ हर॑यस्त्वा वहन्ति । ति॒रः स॑मु॒द्रमति॑ रोचसेऽर्ण॒वम् ॥ (३६)
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अथर्ववेद मन्त्र 13.1.36 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे सूर्य! मंत्र के द्वारा ये यज्ञ तुम्हें वहन करते हैं. तुम तिरछे हो कर सागर को अत्यधिक शोभायमान करते हो. (३६)
EN English Translation
O sun! These yajnas bear you through mantras. You are diagonally and make the ocean very beautiful. (36)