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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 1 • Mantra 43

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 1 • मन्त्र 43

13.1.43

Mantra ID: 13.1.43

आ॒रोह॒न्द्याम॒मृतः॒ प्राव॑ मे॒ वचः॑ । उत्त्वा॑ य॒ज्ञा ब्रह्म॑पूता वहन्त्यध्व॒गतो॒ हर॑यस्त्वा वहन्ति ॥ (४३)

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अथर्ववेद मन्त्र 13.1.43 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सूर्य देव! तुम अमृत हो. सूर्यलोक में चढ़ते हुए तुम मेरे वचन की रक्षा करो. मंत्रमय यज्ञ और मार्गगामी अश्व तुम्हें वहन करते हैं. (४३)

EN English Translation

O Sun God! You are nectar. Protect my word as you ascend to the sunland. The mantra yajna and the margagami horse carry you. (43)

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