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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 1 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 1 • मन्त्र 5

13.1.5

Mantra ID: 13.1.5

आ ते॑ रा॒ष्ट्रमि॒ह रोहि॑तोऽहार्षी॒द्व्यास्थ॒न्मृधो॒ अभ॑यं ते अभूत् । तस्मै॑ ते द्यावापृथि॒वी रे॒वती॑भिः॒ कामं॑ दुहाथामि॒ह शक्व॑रीभिः ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 13.1.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे यजमान! तेरे राष्ट्र पर सूर्य आ गए हैं, इसलिए तू युद्ध का भय मत कर. आकाश, पृथ्वी और धन देने वाली ऋचाएं तेरे लिए कामनाओं का दोहन करें. (५)

EN English Translation

O host! The sun has come upon your nation, so do not be afraid of war. Let the sky, earth and wealth-giving riches exploit the wishes for you. (5)

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