Popular:
अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 1 • Mantra 58

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 1 • मन्त्र 58

13.1.58

Mantra ID: 13.1.58

यो अ॒द्य दे॑व सूर्य॒ त्वां च॒ मां चा॑न्त॒राय॑ति । दुः॒ष्वप्न्यं॒ तस्मि॒ञ्छम॑लं दुरि॒तानि॑ च मृज्महे ॥ (५८)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 13.1.58 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सूर्य देव! हमारे और आप के मध्य जो बाधक होना चाहता है, उसे में पाप, दुःस्वप्न तथा दुष्कर्मो में स्थापित करता हूं. (५८)

EN English Translation

O Sun God! I establish what wants to be a barrier between us and you in sin, nightmares and misdeeds. (58)

卐 HinduText AI