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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 1 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 1 • मन्त्र 9

13.1.9

Mantra ID: 13.1.9

यास्ते॒ रुहः॑ प्र॒रुहो॒ यास्त॑ आ॒रुहो॒ याभि॑रापृ॒णासि॒ दिव॑म॒न्तरि॑क्षम् । तासां॒ ब्रह्म॑णा॒ पय॑सा वावृधा॒नो वि॒शि रा॒ष्ट्रे जा॑गृहि॒ रोहि॑तस्य ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 13.1.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मनुष्यो! तुम्हारी जो रोहण, प्ररोहण और आरोहण करने वाली फसलें, लताएं आदि हैं, जिन के द्वारा तुम अंतरिक्ष के प्राणियों का भरणपोषण करते हो, उस के दूध के समान सारयुक्त कर्म के द्वारा मित्र बाल और वृद्धि को प्राप्त होते हुए तुम सूर्य के राष्ट्र में सचेत रहो. (९)

EN English Translation

O men! Be alert in the nation of the sun, attaining friendly hair and growth through the work that you feed the creatures of space through which you feed the creatures of space, which you have, which are yours, the crops, creepers, etc. that are flowing, climbing and climbing. (9)

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