Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
13.3.2
यस्मा॒द्वाता॑ ऋतु॒था पव॑न्ते॒ यस्मा॑त्समु॒द्रा अधि॑ वि॒क्षर॑न्ति । तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ । उद्वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न् ॥ (२)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 13.3.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जिस देवता के प्रभाव से वायु ऋतुओं के अनुसार चलती है तथा समुद्र प्रभावित होते हैं, क्रोध में भरे हुए सूर्य का जो अपमान करता है अथवा विद्वान् ब्राह्मण की हिंसा करता है, हे रोहित देव! उस ब्रह्मघाती को कंपित करते हुए क्षीण करो और बंधन में डाल दो. (२)
EN English Translation
The deity under whose influence the air moves according to the seasons and the seas are affected, who insults the sun full of anger or does violence to the learned Brahmin, O Rohit Dev! Weaken that brahmaghati by staggering and put it in bondage. (2)