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अथर्ववेद

Kanda 13 • Sukta 7 • Mantra 15

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 13 • सूक्त 7 • मन्त्र 15

13.7.15

Mantra ID: 13.7.15

यद्वा॑ कृ॒णोष्योष॑धी॒र्यद्वा॑ वर्षसि भ॒द्रया॒ यद्वा॑ ज॒न्यमवी॑वृधः ॥ (१५)

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अथर्ववेद मन्त्र 13.7.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

कल्याणमयी वृष्टि के रूप में तुम रसते हो तथा उत्पन्न हुओं को बढ़ाते हो. (१५)

EN English Translation

In the form of welfare rain, you get juice and increase the ones born. (15)

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