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अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 1 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 1 • मन्त्र 10

14.1.10

Mantra ID: 14.1.10

मनो॑ अस्या॒ अन॑आसी॒द्द्यौरा॑सीदु॒त च्छ॒दिः । शु॒क्राव॑न॒ड्वाहा॑वास्तां॒ यदया॑त्सू॒र्या पति॑म् ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 14.1.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब सूर्या अपने पति को प्राप्त हुई तब मन रथ बना तथा द्युलोक उस की छत हुआ. उस रथ में दो बलवान बैल जुड़े हुए थे. (१०)

EN English Translation

When Surya received her husband, the mind became a chariot and Dyulok became its roof. Two strong bulls were attached to that chariot. (10)

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