Popular:
अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 1 • Mantra 15

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 1 • मन्त्र 15

14.1.15

Mantra ID: 14.1.15

यदया॑तं शुभस्पतीवरे॒यं सू॒र्यामुप॑ । विश्वे॑ दे॒वा अनु॒ तद्वा॑मजानन्पु॒त्रः पि॒तर॑मवृणीतपू॒षा ॥ (१५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 14.1.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सूर्या! तेरे रथ के दोनों चक्रों को ज्ञानीजन ऋतु के अनुसार जानते हैं. तेरे रथ का जो एक चक्र गुप्त है, उसे विशेष ज्ञानी ही जानते हैं. (१५)

EN English Translation

O Sun! The wise know both the chakras of your chariot according to the season. Only those who know the one cycle of your chariot that is secret know it. (15)

卐 HinduText AI