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अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 1 • Mantra 21

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 1 • मन्त्र 21

14.1.21

Mantra ID: 14.1.21

इ॒ह प्रि॒यंप्र॒जायै॑ ते॒ समृ॑ध्यताम॒स्मिन्गृ॒हे गार्ह॑पत्याय जागृहि । ए॒ना पत्या॑त॒न्वं सं स्पृ॑श॒स्वाथ॒ जिर्वि॑र्वि॒दथ॒मा व॑दासि ॥ (२१)

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अथर्ववेद मन्त्र 14.1.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

अपने पति के घर में तू गार्हपत्य अग्नि के प्रति सचेत रह. तेरी संतान के लिए वस्तुएं बढ़ें. तू अपनी आयु पूर्ण होने तक बोलती रहे. (२१)

EN English Translation

In your husband's house, you should be aware of the agni of agni. Increase things for your children. You kept speaking till you complete your age. (21)

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