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14.1.58
प्र त्वा॑मुञ्चामि॒ वरु॑णस्य॒ पाशा॒द्येन॒ त्वाब॑ध्नात्सवि॒ता सु॒शेवाः॑ । उ॒रुं लो॒कंसु॒गमत्र॒ पन्थां॑ कृणोमि॒ तुभ्यं॑ स॒हप॑त्न्यै वधु ॥ (५८)
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अथर्ववेद मन्त्र 14.1.58 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
सविता ने तुझे वरुण के जिस पाश में बांधा है उस पाश से मैं तुझे छुड़ाता हूं. हे पत्नी! मैं तेरे साथ लोक के इस विस्तृत मार्ग को सरल बनाता हूं. (५८)
EN English Translation
I rescue you from the loop in which Savita has tied you to Varuna. O wife! I simplify this vast path of folk with you. (58)