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अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 1 • Mantra 60

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 1 • मन्त्र 60

14.1.60

Mantra ID: 14.1.60

भग॑स्ततक्षच॒तुरः॒ पादा॒न्भग॑स्ततक्ष च॒त्वार्युष्प॑लानि । त्वष्टा॑ पिपेश मध्य॒तोऽनु॒वर्ध्रा॒न्त्सा नो॑ अस्तु सुमङ्ग॒ली ॥ (६०)

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अथर्ववेद मन्त्र 14.1.60 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

भग देवता ने इस के पैरों के लिए चार आभूषणों को तथा शरीर पर धारण करने योग्य चार फूलों को बनाया है. उन्होंने कमर में पहनने योग्य करधनी बनाई है. इन आभूषणों को धारण कर के यह स्त्री उत्तम मंगलमयी बने. (६०)

EN English Translation

The God of God has made four ornaments for his feet and four flowers to wear on the body. He has made a wearable kardhani in the waist. By wearing these ornaments, this woman became the best auspicious. (60)

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