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अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 2 • Mantra 10

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 2 • मन्त्र 10

14.2.10

Mantra ID: 14.2.10

येव॒ध्वश्च॒न्द्रं व॑ह॒तुं यक्ष्मा॑ यन्ति॒ जनाँ॒ अनु॑ । पुन॒स्तान्य॒ज्ञिया॑दे॒वा न॑यन्तु॒ यत॒ आग॑ताः ॥ (१०)

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अथर्ववेद मन्त्र 14.2.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

चंद्रमा के समान प्रसन्नता देने वाले उपहार की ओर जो साधन आते हैं, यज्ञीय देवता उन्हें वहीं पहुंचा दें, जहां से वे आते हैं. (१०)

EN English Translation

The sacrificial deities should deliver the means that come towards the gift of happiness like the moon, where they come from. (10)

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