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अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 2 • Mantra 43

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 2 • मन्त्र 43

14.2.43

Mantra ID: 14.2.43

स्यो॒नाद्योने॒रधि॒ बुध्य॑मानौ हसामु॒दौ मह॑सा॒ मोद॑मानौ । सु॒गू सु॑पु॒त्रौसु॑गृ॒हौ त॑राथो जी॒वावु॒षसो॑ विभा॒तीः ॥ (४३)

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अथर्ववेद मन्त्र 14.2.43 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हम दोनों हंसते हुए प्रसन्नता को तथा सुखपूर्वक ज्ञान को प्राप्त करें. हम सुंदर गति वाले हों तथा पुत्र आदि से संपन्न रहते हुए उषाओं को पार करें. (४३)

EN English Translation

Let us both laugh and get happiness and knowledge happily. Let us be of beautiful speed and cross the ushas while being endowed with sons etc. (43)

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