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अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 2 • Mantra 51

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 2 • मन्त्र 51

14.2.51

Mantra ID: 14.2.51

ये अन्ता॒याव॑तीः॒ सिचो॒ य ओत॑वो॒ ये च॒ तन्त॑वः । वासो॒ यत्पत्नी॑भिरु॒तं तन्नः॑स्यो॒नमुप॑ स्पृशात् ॥ (५१)

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अथर्ववेद मन्त्र 14.2.51 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इस वस्त्र में जो झालरें और किनारियां हैं, जो ताने और बाने हैं तथा जो वस्त्र स्त्रियों ने बुना है, वह हमारे शरीर का सुखपूर्वक स्पर्श करने वाला हो. (५१)

EN English Translation

The fringes and edges in this cloth, the warp and weft and the cloth that women have woven, should touch our body happily. (51)

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