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अथर्ववेद

Kanda 14 • Sukta 2 • Mantra 56

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 14 • सूक्त 2 • मन्त्र 56

14.2.56

Mantra ID: 14.2.56

बृह॒स्पति॒नाव॑सृष्टां॒ विश्वे॑ दे॒वा अ॑धारयन् । यशो॒ गोषु॒ प्रवि॑ष्टं॒यत्तेने॒मां सं सृ॑जामसि ॥ (५६)

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अथर्ववेद मन्त्र 14.2.56 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

बृहस्पति देव द्वारा इस ओषधि का सृजन हुआ है. गायों में जो यज्ञ प्रवेश कर गया है, मैं उस यज्ञ से इसे संयुक्त करता हूं. (५६)

EN English Translation

This medicine has been created by Jupiter Dev. The yajna that has entered the cows, I combine it with that yajna. (56)

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