Kanda 15 • Sukta 13
Atharvaveda (अथर्ववेद)
Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
Kanda 15 • Sukta 13
तद् यस्यैवं विद्वान् व्रात्य एकां रात्रिमतिथिर्गृहे वसति.. (१)
हि हिन्दी अनुवाद
जिस के घर में ऐसा विद्वान् व्रात्य रात्रि में अतिथि होता है, वह उस के आने के फल से पृथ्वी के सभी पुण्य लोकों पर विजय प्राप्त करता है. (१)
EN English Translation
English translation not available.
हि हिन्दी अनुवाद
जिस के घर में ऐसा विद्वान् व्रात्य रात्रि में अतिथि होता है, वह उस के आने के फल से पृथ्वी के सभी पुण्य लोकों पर विजय प्राप्त करता है. (२)
EN English Translation
English translation not available.
तद् यस्यैवं विद्वान् व्रात्यो द्वितीयां रात्रिमतिथिर्गृहे वसति.. (३)
हि हिन्दी अनुवाद
जिस गृहस्थ के घर में ऐसा विद्वान् व्रात्य रात्रि में निवास करता है, वह गृहस्थ उस के फल के रूप में अंत में स्थित सभी पुण्य लोकों को जीत लेता है. (३)
EN English Translation
English translation not available.
हि हिन्दी अनुवाद
जिस गृहस्थ के घर में ऐसा विद्वान् व्रात्य रात्रि में निवास करता है, वह गृहस्थ उस के फल के रूप में अंत में स्थित सभी पुण्य लोकों को जीत लेता है. (४)
EN English Translation
English translation not available.
तद् यस्यैवं विद्वान् व्रात्यस्तृतीयां रात्रिमतिथिर्गृहे वसति.. (५)
हि हिन्दी अनुवाद
यदि ऐसा विद्वान् व्रात्य अतिथि के रूप में गृहस्थ के घर में तीसरी रात्रि में भी निवास करता है तो उस के फल से वह गृहस्थ आकाश में स्थित समस्त पुण्य लोकों को अपने लिए मुक्त कर लेता है. (५)
EN English Translation
English translation not available.
हि हिन्दी अनुवाद
यदि ऐसा विद्वान् व्रात्य अतिथि के रूप में गृहस्थ के घर में तीसरी रात्रि में भी निवास करता है तो उस के फल से वह गृहस्थ आकाश में स्थित समस्त पुण्य लोकों को अपने लिए मुक्त कर लेता है. (६)
EN English Translation
English translation not available.
तद् यस्यैवं विद्वान् व्रात्यश्चतुर्थी रात्रिमतिथिर्गृहे वसति.. (७)
हि हिन्दी अनुवाद
जिस गृहस्थ के घर में ऐसा व्रात्य चौथी रात निवास करता है तो उस के फल के रूप में वह गृहस्थ पुण्यात्माओं के सभी लोकों को अपने लिए मुक्त कर लेता है. (७)
EN English Translation
English translation not available.
हि हिन्दी अनुवाद
जिस गृहस्थ के घर में ऐसा व्रात्य चौथी रात निवास करता है तो उस के फल के रूप में वह गृहस्थ पुण्यात्माओं के सभी लोकों को अपने लिए मुक्त कर लेता है. (८)
EN English Translation
English translation not available.
तद् यस्यैवं विद्वान् व्रात्यो परिमिता रात्रीरतिथिर्गृहे वसति.. (९)
हि हिन्दी अनुवाद
जिस गृहस्थ के घर में ऐसा विद्वान् व्रात्य अनेक रातों तक निवास करता है तो उस के फल के रूप में वह गृहस्थ अनेक पुण्य लोकों को अपने लिए मुक्त कर लेता है. (९)
EN English Translation
English translation not available.
य एवापरिमिताः पुण्या लोकास्तानेव तेनाव रुन्द्धे.. (१०)
हि हिन्दी अनुवाद
जिस गृहस्थ के घर में ऐसा विद्वान् व्रात्य अनेक रातों तक निवास करता है तो उस के फल के रूप में वह गृहस्थ अनेक पुण्य लोकों को अपने लिए मुक्त कर लेता है. (१०)
EN English Translation
English translation not available.
अथ यस्याव्रात्यो वात्यब्रुवो नामबिश्रत्यतिथिर्गृहानागच्छेत्.. (११)
हि हिन्दी अनुवाद
जिस के घर अपनेआप को व्रात्य बताने वाला कोई अब्रात्य आए तो वया गृहस्थ उसे अपने घर से भगा दे. नहीं, उस को भी भगाना नहीं चाहिए. (११)
EN English Translation
English translation not available.
हि हिन्दी अनुवाद
जिस के घर अपनेआप को व्रात्य बताने वाला कोई अब्रात्य आए तो वया गृहस्थ उसे अपने घर से भगा दे. नहीं, उस को भी भगाना नहीं चाहिए. (१२)
EN English Translation
English translation not available.
अ॒स्यै दे॒वता॑याउद॒कं या॑चामी॒मां दे॒वतां॑ वासय इ॒मामि॒मां दे॒वतां॒ परि॑ वेवे॒ष्मीत्ये॑नं॒परि॑ वेविष्यात् ॥ (१३)
हि हिन्दी अनुवाद
मैं इस देवता को अपने घर में निवास देता हूं. मैं इस से जल ग्रहण करने की प्रार्थना करता हूं. मैं इस देवता के लिए भोजन परोसता हूं. ऐसा स्वीकार करता हुआ उस के लिए भोजन परोसना आदि कार्य करे. (१३)
EN English Translation
I give this deity a residence in my house. I pray to him to take water from him. I serve food for this deity. Accept this and serve food for him, etc. (13)
तस्या॑मे॒वास्य॒तद्दे॒वता॑यां हु॒तं भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (१४)
हि हिन्दी अनुवाद
जो इस बात को जानता है, उस की आहुति देवताओं के लिए दी जाने पर उत्तम आहुति बन जाती है. (१४)
EN English Translation
He who knows this, his sacrifice becomes the best sacrifice when given to the gods. (14)