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अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 14 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 14 • मन्त्र 7

15.14.7

Mantra ID: 15.14.7

स यदुदी॑चीं॒दिश॒मनु॒ व्यच॑ल॒त् सोमो॒ राजा॑ भू॒त्वानु॒व्यचलत्सप्त॒र्षिभि॑र्हु॒तआहु॑तिमन्ना॒दीं कृ॒त्वा ॥ (७)

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अथर्ववेद मन्त्र 15.14.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब वह उत्तर दिशा की ओर चला, तब वह समप्तर्षियों द्वारा दी गई आहुति को अन्नाद बना कर तथा सोम हो कर चला. (७)

EN English Translation

When he walked towards the north, he went on to make the sacrifice given by the sampratashis as a food and walked in the som. (7)

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