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अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 14 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 14 • मन्त्र 9

15.14.9

Mantra ID: 15.14.9

स यद्ध्रु॒वांदिश॒मनु॒ व्यच॑ल॒द्विष्णु॑र्भू॒त्वानु॒व्यचलद्वि॒राज॑मन्ना॒दीं कृ॒त्वा ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 15.14.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जब वह ध्रुव दिशा की ओर चला, तब विराट को अन्नाद बता कर स्वयं विष्णु रूप में चला. (९)

EN English Translation

When he walked towards the pole direction, he went in the form of Vishnu himself, calling Virat Annad. (9)

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