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अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 17 • Mantra 8

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 17 • मन्त्र 8

15.17.8

Mantra ID: 15.17.8

तस्य॒व्रात्य॑स्य । स॑मा॒नमर्थं॒ परि॑ यन्ति दे॒वाः सं॑वत्स॒रं वा ए॒तदृ॒तवो॑ऽनु॒परि॑यन्ति॒ व्रात्यं॑ च ॥ (८)

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अथर्ववेद मन्त्र 15.17.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवगण इस के समान अर्थ को प्राप्त होते तथा संवत्सर और ऋतुएं भी इस का अनुमान करते हैं. (८)

EN English Translation

The devas get the same meaning as this and samvatsar and seasons also predict it. (8)

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