Atharvaveda Quick Jump
Navigate to any Kanda or Mantra
15.2.8
की॒र्तिश्च॒यश॑श्च पुरःस॒रावैनं॑ की॒र्तिर्ग॑च्छ॒त्या यशो॑ गच्छति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (८)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
अथर्ववेद मन्त्र 15.2.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
कीर्ति और यश उस के आगे चलने वाले हैं. कीर्ति उस के समीप आती है तथा यश उस के पास आता है. जो इस प्रकार जानता है, उसे कीर्ति और यश प्राप्त होते हैं. (८)
EN English Translation
Kirti and Yash are going to walk ahead of him. Kirti comes close to him and Yash comes to him. He who knows in this way receives fame and fame. (8)