Popular:
अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 6 • Mantra 18

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 6 • मन्त्र 18

15.6.18

Mantra ID: 15.6.18

ऋ॑तू॒नां च॒ वै सआ॑र्त॒वानां॑ च लो॒कानां॑ च लौ॒क्यानां॑ च॒ मासा॑नां चार्धमा॒सानां॑चाहोरा॒त्रयो॑श्च प्रि॒यं धाम॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (१८)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 15.6.18 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो इस बात को जानता है, वह पुरुष ऋतुओं, पदार्थो, लोक, मासों, पक्षों, दिवसों और रात्रियों का प्रिय धाम बनता है. (१८)

EN English Translation

The man who knows this becomes the beloved abode of seasons, substances, folk, months, sides, days and nights. (18)

卐 HinduText AI