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अथर्ववेद

Kanda 15 • Sukta 6 • Mantra 23

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 15 • सूक्त 6 • मन्त्र 23

15.6.23

Mantra ID: 15.6.23

वि॒राज॑श्च॒ वै ससर्वे॑षां च दे॒वानां॒ सर्वा॑सां च दे॒वता॑नां प्रि॒यं धाम॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥ (२३)

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अथर्ववेद मन्त्र 15.6.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जो इस बात को जानता है, वह विराट और सभी देवों का प्रिय धाम होता है. (२३)

EN English Translation

The one who knows this is the beloved abode of Virat and all the gods. (23)

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