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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 1 • Mantra 41

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 1 • मन्त्र 41

18.1.41

Mantra ID: 18.1.41

सर॑स्वतींदेव॒यन्तो॑ हवन्ते॒ सर॑स्वतीमध्व॒रे ता॒यमा॑ने । सर॑स्वतीं सु॒कृतो॑ हवन्ते॒सर॑स्वती दा॒शुषे॒ वार्यं॑ दात् ॥ (४१)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.1.41 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मृतक संस्कार करने वाले तथा अग्नि की इच्छा करते हुए पुरुष सरस्वती का आह्वान करते हैं. हम ज्योतिष्टोम आदि यज्ञों में भी सरस्वती को बुलाते हैं. देवी सरस्वती हवि प्रदान करने वाले यजमान को मनचाहा धन दें. (४१)

EN English Translation

Those who perform the dead rites and desire agni, men invoke Saraswati. We also call Saraswati in jyotishtom etc. yagyas. Give the desired money to the host who provides Goddess Saraswati. (41)

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