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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 2 • Mantra 24

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 2 • मन्त्र 24

18.2.24

Mantra ID: 18.2.24

मा ते॒ मनो॒मासो॒र्माङ्गा॑नां॒ मा रस॑स्य ते । मा ते॑ हास्त त॒न्वः किं च॒नेह ॥ (२४)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.2.24 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रेत! तेरा मन और तेरी इंद्रियां तेरा त्याग न करें. तेरे प्राण के किसी अंश का क्षय न हो. तेरे शरीर के अंगों में किसी प्रकार का विकार न हो. तेरे शरीर में रुधिर रस आदि भी पूरी मात्रा में रहें. तेरा कोई भी भाग तुझ से अलग न हो. (२४)

EN English Translation

O ghost! Let your mind and your senses not abandon you. Let no part of your life be lost. There should be no disorder in your body parts. Blood juice etc. should also be in full quantity in your body. No part of you should be separated from you. (24)

卐 HinduText AI