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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 2 • Mantra 27

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 2 • मन्त्र 27

18.2.27

Mantra ID: 18.2.27

अपे॒मं जी॒वाअ॑रुधन्गृ॒हेभ्य॒स्तं निर्व॑हत॒ परि॒ ग्रामा॑दि॒तः । मृ॒त्युर्य॒मस्या॑सीद्दू॒तःप्रचे॑ता॒ असू॑न्पि॒तृभ्यो॑ गम॒यां च॑कार ॥ (२७)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.2.27 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे जीवित बंधुओ! इस प्रेत को घर से ले जाओ. उसे उठा कर ग्राम से बाहर ले जाओ. यम के दूत रूप मृत्यु ने इस के प्राणों को पितर के रूप में करने के लिए ले लिया है. (२७)

EN English Translation

O living brothers! Take this phantom from home. Pick him up and take him out of the gram. Death, the messenger form of Yama, has taken its life to the form of pitar. (27)

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