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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 3 • Mantra 37

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 3 • मन्त्र 37

18.3.37

Mantra ID: 18.3.37

उ॑द॒पूर॑सिमधु॒पूर॑सि वात॒पूर॑सि ॥ (३७)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.3.37 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम उदक को पूर्ण करने वाले, मधु को पूर्ण करने एवं प्राण वायु को पूर्ण करने वाले हो. (३७)

EN English Translation

O agni! You are the one who completes udak, completes honey and completes prana vayu. (37)

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