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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 3 • Mantra 41

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 3 • मन्त्र 41

18.3.41

Mantra ID: 18.3.41

दे॒वेभ्यः॒कम॑वृणीत मृ॒त्युं प्र॒जायै॒ किम॒मृतं॒ नावृ॑णीत । बृह॒स्पति॑र्य॒ज्ञम॑तनुत॒ऋषिः॑ प्रि॒यां य॒मस्त॒न्वमा रि॑रेच ॥ (४१)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.3.41 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सृष्टि के आरंभ में विधाता ने इंद्र आदि देवों के निमित्त किस प्रकार की मृत्यु की व्यवस्था की थी? इस के बाद सूर्य पुत्र यम ने बृहस्पति के कृपा पात्र मनुष्यों की देह को सभी ओर से खींच कर प्राण हीन किया. (४१)

EN English Translation

At the beginning of the creation, what kind of death was arranged by Vidhata for indra etc. gods? After this, Yama, the son of Sun, pulled the body of humans from all sides and made them lifeless. (41)

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