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18.3.47
येता॑तृ॒षुर्दे॑व॒त्रा जेह॑माना होत्रा॒विदः॒ स्तोम॑तष्टासो अ॒र्कैः । आग्ने॑ याहिस॒हस्रं॑ देवव॒न्दैः स॒त्यैः क॒विभि॒रृषि॑भिर्घर्म॒सद्भिः॑ ॥ (४७)
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अथर्ववेद मन्त्र 18.3.47 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
देवों में व्याप्त होने वाले, सात परिक्रमा करने वालों के द्वारा किए हुए यज्ञों को जानते हुए, अर्चनीय स्तुति करने वाले जो पितर प्यासे हैं, देवों को प्रणाम करने वाले, उन देवों साथ तथा सत्य फल एवं क्रांतदर्शी ऋषियों के साथ सोमयाग में बैठने वाले हे अग्नि! हमारे लिए अपरिमित धन ले कर आओ. (४७)
EN English Translation
Knowing the sacrifices performed by the seven parikrama performed in the devas, those who give unseen praise, those who are thirsty, those who bow down to the gods, those who sit in the somyag with the true fruits and the revolutionary sages, O Agni! Bring us unlimited money. (47)