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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 3 • Mantra 62

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 3 • मन्त्र 62

18.3.62

Mantra ID: 18.3.62

वि॒वस्वा॑न्नोअमृत॒त्वे द॑धातु॒ परै॑तु मृ॒त्युर॒मृतं॑ न॒ ऐतु॑ । इ॑मान्रक्षतु॒ पुरु॑षा॒नाज॑रि॒म्णो मो ष्वेषा॒मस॑वो य॒मं गुः॑ ॥ (६२)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.3.62 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

विवस्वान अर्थात्‌ सूर्य हमें अमृतत्व में धारण करें अर्थात्‌ हमें मृत्यु रहित बनाएं. उस के प्रभाव से मृत्यु मुझ से विमुख हो जाए. हम को मरणहीनता प्राप्त हो. सूर्य देव हमारे पुत्रों और पौत्रों का वृद्धावस्था तक पालन करें. इन पुरुषों के पुत्र विवस्वान के पुत्र यम के पास न जाएं. (६२)

EN English Translation

Vivasvan means the Sun holds us in nectar, that is, make us death-free. May death turn away from me under his influence. May we have deathlessness. May the Sun God bless our sons and grandsons till old age. Do not go to Yama, son of Vivasvan, the son of these men. (62)

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