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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 3 • Mantra 68

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 3 • मन्त्र 68

18.3.68

Mantra ID: 18.3.68

अ॑पू॒पापि॑हितान्कु॒म्भान्यांस्ते॑ दे॒वा अधा॑रयन् । ते ते॑ सन्तु स्व॒धाव॑न्तो॒मधु॑मन्तो घृत॒श्चुतः॑ ॥ (६८)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.3.68 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रेत! तेरे लिए देवों ने पूओं से ढके हुए तथा घी से भरे हुए घड़ों को धारण किया था, वे घड़े तेरे लिए घी टपकाने वाले हों. (६८)

EN English Translation

O ghost! For you, the gods wore pitchers covered with poos and filled with ghee, those pitchers should be dripping ghee for you. (68)

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