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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 3 • Mantra 9

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 3 • मन्त्र 9

18.3.9

Mantra ID: 18.3.9

प्र च्य॑वस्वत॒न्वं सं भ॑रस्व॒ मा ते॒ गात्रा॒ वि हा॑यि॒ मो शरी॑रम् । मनो॒निवि॑ष्टमनु॒संवि॑शस्व॒ यत्र॒ भूमे॑र्जु॒षसे॒ तत्र॑ गच्छ ॥ (९)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.3.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रेत! तू अपने शरीर के सब अंगों को एकत्र कर. तेरा कोई भी अंग यहां न छूट जाए. तेरा मन जिन स्वर्ग आदि स्थानों में रमा है, तू वहां प्रवेश कर. तू जिस भूमि से प्रेम करता है, उसी भूमि को प्राप्त हो. (९)

EN English Translation

O ghost! Gather all the parts of your body. None of your organs should be left here. Enter the places where your mind is rama in the heavens and other places. The land you love, get the same land. (9)

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