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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 4 • Mantra 34

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 4 • मन्त्र 34

18.4.34

Mantra ID: 18.4.34

एनी॑र्धा॒नाहरि॑णीः॒ श्येनी॑रस्य कृ॒ष्णा धा॒ना रोहि॑णीर्धे॒नव॑स्ते । ति॒लव॑त्सा॒ऊर्ज॑म॒स्मै दुहा॑ना वि॒श्वाहा॑ स॒न्त्वन॑पस्पुरन्तीः ॥ (३४)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.4.34 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रेत! ये हरे रंग वाले धान तेरे लिए लाल श्वेत रंग वाली गाएं बन जाएं. काले धान लाल रंग की गाएं बनें और तिल उन के बछड़े हों. इस प्रकार की गाएं कभी नष्ट नहीं होतीं. वे तेरे लिए सदा बल देने वाला दूध देती रहें. (३४)

EN English Translation

O ghost! Let these green paddy become red white songs for you. Black paddy should become red cows and sesame seeds should be their calves. Such cows are never destroyed. May they always give you the milk that gives you strength. (34)

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