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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 4 • Mantra 50

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 4 • मन्त्र 50

18.4.50

Mantra ID: 18.4.50

एयम॑ग॒न्दक्षि॑णाभद्र॒तो नो॑ अ॒नेन॑ द॒त्ता सु॒दुघा॑ वयो॒धाः । यौव॑ने जी॒वानु॑पपृञ्च॒ती ज॒रापि॒तृभ्य॑ उपसं॒परा॑णयादि॒मान् ॥ (५०)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.4.50 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह संस्कार करने वालों के पास यह गौ रूप दक्षिणा आ रही है. सुंदर फल और दूध रूपी अन्न को देती हुई यह गौ वृद्धावस्था में भी युवती रहे. संस्कार किए गए पुरुष को यह पूर्व काल के पितरों के पास पहुंचाए. (५०)

EN English Translation

This cow form Dakshina is coming to those who perform this sanskar. Giving beautiful fruits and milk-like food, this cow remained young even in old age. The man who was cremated should take it to the ancestors of the former period. (50)

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