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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 4 • Mantra 52

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 4 • मन्त्र 52

18.4.52

Mantra ID: 18.4.52

एदं ब॒र्हिर॑सदो॒मेध्यो॑ऽभूः॒ प्रति॑ त्वा जानन्तु पि॒तरः॒ परे॑तम् । य॑थाप॒रु त॒न्वं संभ॑रस्व गात्राणि ते॒ ब्रह्म॑णा कल्पयामि ॥ (५२)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.4.52 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रेत! चिता के समीप बिछे हुए कुशों पर बैठ कर तू पवित्र हो गया है. तू दहन से शुद्ध हो गया है. यहां से गए हुए पितर तुझ को जान लें. तू जोड़ों के अनुसार अपने शरीर को पूर्ण कर. मैं मंत्रों के द्वारा तेरे अंगों को समर्थ बनाता हूं. तात्पर्य यह है कि मैं मंत्रों के द्वारा तुझे शक्ति प्रदान करता हूं. (५२)

EN English Translation

O ghost! You have become pure by sitting on the kushas laid near the pyre. You have been purified by combustion. Know you, the father who left here. Complete your body according to the joints. I make your organs capable through mantras. The meaning is that I give you strength through mantras. (52)

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