Popular:
अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 4 • Mantra 7

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 4 • मन्त्र 7

18.4.7

Mantra ID: 18.4.7

ती॒र्थैस्त॑रन्तिप्र॒वतो॑ म॒हीरिति॑ यज्ञ॒कृतः॑ सु॒कृतो॒ येन॒ यन्ति॑ । अत्रा॑दधु॒र्यज॑मानायलो॒कं दिशो॑ भू॒तानि॒ यदक॑ल्पयन्त ॥ (७)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

अथर्ववेद मन्त्र 18.4.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

लोग तीर्थो तथा यज्ञादि कर्मो के द्वारा बड़ीबड़ी विपत्तियों से पार हो जाते हैं. इस प्रकार विचार करने वाले तथा यज्ञ कर्म करते हुए पुरुष जिस मार्ग से स्वर्ग को जाते हैं, उस मार्ग को खोजते हुए यज्ञ कर्ता इस यजमान के लिए वह मार्ग खोलें. (७)

EN English Translation

People overcome great calamities through pilgrimages and sacrifices. In this way, those who think and do yajna karma, while searching for the path through which men go to heaven, the yajna karta should open that path for this host. (7)

卐 HinduText AI