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अथर्ववेद

Kanda 18 • Sukta 4 • Mantra 88

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 18 • सूक्त 4 • मन्त्र 88

18.4.88

Mantra ID: 18.4.88

आ त्वा॑ग्नइधीमहि द्यु॒मन्तं॑ देवा॒जर॑म् । यद्घ॒ सा ते॒ पनी॑यसी स॒मिद्दी॒दय॑ति॒ द्यवि॑ । इषं॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र ॥ (८८)

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अथर्ववेद मन्त्र 18.4.88 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रकाशमान अग्नि! तुम चमकने वाली और जरा रहित हो. हम तुम्हें प्रकाशित करते हैं. तुम्हारी अत्यधिक प्रशंसनीय दीप्ति अंतरिक्ष में प्रकाशित हो रही है. हे अग्नि! जो तुम्हारी स्तुति करते हैं, उन के लिए तुम अन्न प्रदान करो. (८८)

EN English Translation

O shining agni! You are shining and a little devoid. We publish you. Your highly admirable radiance is being illuminated in space. O agni! Provide food for those who praise you. (88)

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