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अथर्ववेद

Kanda 2 • Sukta 14 • Mantra 3

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 2 • सूक्त 14 • मन्त्र 3

2.14.3

Mantra ID: 2.14.3

अ॒सौ यो अ॑ध॒राद्गृ॒हस्तत्र॑ सन्त्वरा॒य्यः॑ । तत्र॒ सेदि॒र्न्यु॑च्यतु॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः॑ ॥ (३)

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अथर्ववेद मन्त्र 2.14.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यह जो अत्यधिक प्रसिद्ध पाताललोक है, कल्याण में विघ्न करने वाली राक्षसियां वहां चली जाएं. पाप देवता निर्मित वहीं पाताल में नीचे चली जाएं. सभी राक्षसियां भी वहीं रहें. (३)

EN English Translation

This is the highly famous Patallok, the demons who disturb welfare should go there. Become sin gods and go down into the netherworld there. All the demons should also stay there. (3)

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