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अथर्ववेद

Kanda 2 • Sukta 15 • Mantra 5

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 2 • सूक्त 15 • मन्त्र 5

2.15.5

Mantra ID: 2.15.5

यथा॑ स॒त्यं चानृ॑तं च॒ न बि॑भी॒तो न रिष्य॑तः । ए॒वा मे॑ प्राण॒ मा बि॑भेः ॥ (५)

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अथर्ववेद मन्त्र 2.15.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस प्रकार सत्य और असत्य न किसी से भयभीत होते हैं, न आशंकित होते हैं और न कभी नष्ट होते हैं, हे मेरे प्राणो! उसी प्रकार तुम भी मत डरो. (५)

EN English Translation

Just as truth and falsehood are neither afraid of anyone, nor apprehensive, nor ever destroyed, O my life! Similarly, don't be afraid. (5)

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