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अथर्ववेद

Kanda 2 • Sukta 23 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 2 • सूक्त 23 • मन्त्र 1

2.23.1

Mantra ID: 2.23.1

आपो॒ यद्व॒स्तप॒स्तेन॒ तं प्र॑ति तपत॒ यो॑३ ऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 2.23.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे जल देव! तुम्हारी जो दूसरों को संताप देने की शक्ति है, उस से उन्हें संताप प्रदान करो जो हम से द्वेष करते हैं और हम जिन से द्वेष करते हैं. (१)

EN English Translation

O God of Water! Give anger to those who hate us and those we hate with you who have the power to anger others. (1)

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