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अथर्ववेद

Kanda 2 • Sukta 27 • Mantra 4

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 2 • सूक्त 27 • मन्त्र 4

2.27.4

Mantra ID: 2.27.4

पा॒टामिन्द्रो॒ व्या॑श्ना॒दसु॑रेभ्य॒ स्तरी॑तवे । प्राशं॒ प्रति॑प्राशो जह्यर॒सान्कृ॑ण्वोषधे ॥ (४)

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अथर्ववेद मन्त्र 2.27.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने असुरों की हिंसा करने के लिए ग्वारपाठा नाम की जड़ी को खाया था. हे ग्वारपाठा! मुझ प्रश्न पूछने वाले से जो विरोधी प्रतिप्रश्न पूछते हैं, उन्हें तुम पराजित करो तथा मेरे विरोधी वक्ताओं का गला सुखा दो, जिस से बोल न सकें. (४)

EN English Translation

Indra had eaten a herb named Guarpatha to commit violence against the asuras. O guar patha! Defeat the opponents who ask me questions and dry the throats of my opposing speakers, so that they cannot speak. (4)

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